क्या राहुल गांधी की यात्रा बिहार चुनाव पर डालेगी असर?
इस यात्रा में राहुल गांधी के साथ इंडिया ब्लॉक के कई मुख्यमंत्री जैसे एमके स्टालिन, रेवंत रेड्डी, सिद्धारमैया, हेमंत सोरेन और समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव भी नजर आए.

करीब 1,300 किलोमीटर की दूरी, 25 जिलों की परिक्रमा, 110 विधानसभा सीटों का सफर और 16 दिनों का लगातार मार्च, राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा सिर्फ एक सियासी प्रदर्शन नहीं लगी, बल्कि मानो आत्मचिंतन की साधना हो. यह याद दिलाती है कि राजनीति का असल मतलब है अनजान लोगों के साथ तब तक चलना, जब तक कि वो अनजान न रह जाएं.
इस यात्रा में राहुल गांधी के साथ इंडिया ब्लॉक के कई मुख्यमंत्री—एमके स्टालिन, रेवंत रेड्डी, सिद्धारमैया, हेमंत सोरेन—और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव भी नजर आए. इस दौरान राहुल गांधी ने विपक्षी गठबंधन को और मजबूत करने की कोशिश की.
यात्रा उन्हें उन सात विधानसभा सीटों तक भी ले गई, जिन्हें कांग्रेस ने 2020 में जीता था. भले ही यह संख्या मामूली है, लेकिन यह इस बात की याद भी दिलाती है कि जमीनी मौजूदगी कभी-कभी गठबंधन के गणित और मतदाता टर्नआउट की तस्वीर बदल सकती है.
















